छपरा के नैनी स्थित द्वारकाधीश मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित एक भव्य मंदिर है, जो गुजरात के प्रसिद्ध द्वारकाधीश मंदिर की तर्ज पर पूरी तरह संगमरमर के पत्थरों से निर्मित है, बिना ईंट, सीमेंट, लोहे या स्टील के। यह मंदिर कारीगरी और भक्ति का अनुपम उदाहरण है, जिसका निर्माण 14 वर्षों में पूरा हुआ।
निर्माण और सामग्री
मंदिर का निर्माण गुजरात के सुरेंद्रनगर से मंगवाए गए महंगे संगमरमर के पत्थरों से किया गया है, जिन्हें विशेष क्लिप-कट विधि से जोड़ा गया। आगरा, राजस्थान और केरल से भी मजबूत पत्थर लाए गए, जबकि दरवाजों व खंभों में लकड़ी और रेजिन का उपयोग हुआ। कुल लागत 8.5 से 10 करोड़ रुपये बताई जाती है।
वास्तुशिल्प विशेषताएं
40 फुट ऊंचा यह मंदिर एक विशाल गुम्बद से सुसज्जित है, जिसमें राधा-कृष्ण, शिव-पार्वती, दुर्गा, गणेश और हनुमान की प्रतिमाएं स्थापित हैं। गुजरात के द्वारकाधीश मंदिर की नक्काशी और शैली को ध्यान में रखकर 25-30 कारीगरों ने इसे तराशा। खंभों पर जटिल मूर्तियां आकर्षण का केंद्र हैं।
इतिहास और संरक्षक
निर्माण 2005 में शिलान्यास के साथ शुरू हुआ और 2019 में प्राण प्रतिष्ठा हुई। नैनी निवासी राजीव कुमार सिंह, जो अंबानी समूह के सिंप्लेक्स में जीएम हैं, ने अपने माता-पिता की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए इसे बनवाया। उनके पिता जनार्दन प्रसाद सिंह ने नींव रखी थी।
सांस्कृतिक महत्व
जनमाष्टमी पर यहां भारी भीड़ उमड़ती है, और बिहार, यूपी, झारखंड से श्रद्धालु दर्शन को आते हैं। छपरा से मात्र 6 किमी दूर एनएच-331 पर स्थित यह मंदिर स्थानीय रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा दे रहा है। यह बिहार की धरोहर के रूप में उभर रहा है।

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